Panchanguli Mata Jyotish Vidya aur Hastrekha ki devi ke roop me Pooja jata hai, in devi ka tap/sadhna keval anubhavi guru ke margdarshan me karni chahiye.
॥ ॐ ह्रीं पंचांगुली देव्यै स्वाहा ॥
पंचांगुली देवी को विद्या, ज्योतिष, तंत्र, और हस्तरेखा शास्त्र की देवी माना जाता है। यह देवी विशेष रूप से उन साधकों और ज्योतिषियों की आराध्या हैं जो हस्तरेखा विज्ञान, भविष्यवाणी और गूढ़ विद्याओं में पारंगत होना चाहते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पंचांगुली देवी का संबंध देवी दुर्गा के स्वरूपों से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह देवी स्वयं आदि शक्ति की अंगुलियों से प्रकट हुई हैं। ‘पंचांगुली’ का अर्थ होता है "पाँच अंगुलियाँ", जो यह दर्शाता है कि यह देवी मानव हाथ की पाँच उंगलियों में निवास करती हैं।
इनकी साधना करने के लिए विशेष मंत्र, विधि और नियमों का पालन किया जाता है। तंत्र शास्त्र में बताया गया है कि इनकी आराधना से व्यक्ति को गूढ़ रहस्यों और भविष्य कथन की शक्ति प्राप्त होती है।
इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करने से साधक को आध्यात्मिक ज्ञान और भविष्यवाणी की शक्ति प्राप्त हो सकती है।
अगर आप पंचांगुली देवी की साधना के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं या विशेष साधना विधि जानना चाहते हैं, तो इसे किसी अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में करना उचित होगा।